जल संरक्षण

1.1-जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल
सरोवर हमारी धरोवर
जल संरक्षण की दिशा में सरोवर हमारी धरोहर अभियान  में नर्मदा मिशन  द्वारा जीर्ण क्षीर्ण हो चुके पुराने तालाब ,नदी ,झीलों या सरोवरो को पुनर्जीवित करने का कार्य दादा गुरु के मार्गदर्शन और सानिध्य में तेजी से किया जा रहा है अनेक  सरोवर जल विहीन हो चुके हैं उनके पुनर्निर्माण में नर्मदा मिशन तत्परता से लगा हुआ है। जल को संरक्षित करना  आज की प्राथमिकता है क्योंकि आने वाला समय बहुत भयावह है  अनेकों स्थानों पर 1200 फीट तक भी पानी नहीं निकल रहा है *वर्तमान* समय में पानी की समस्या से जूझ रहे समाज को आने वाली भीषण तबाही अभी नहीं दिख रही है किंतु दादा गुरु की दृष्टि में आने वाले समय का चित्र साफ है इसलिए वह अपना सर्वस्व न्योछावर कर प्रकृति संरक्षण और जल संवर्धन संरक्षण पर तथा जल शुद्धिकरण पर अनवरत कार्य कर रहे हैं एवम आने वाली पीढ़ी के अस्तित्व को सुरक्षित करने का पुरजोर प्रयास कर रहे हैं ऐसे अनेकों उदाहरण है जहां मरणासन्न पड़े हुए सरोवर कुएं,बावड़ी अथवा सहायक नदी आज नर्मदा मिशन के अथक प्रयासों से पुनर्जीवित हो चुकी है नरेला  नारायण सरोवर में प्रदूषण से लुप्त हो गए सहस्त्रदल कमल आज पूरे तालाब में अनेकों संख्या में खिल रहे है । सरोवर हमारी धरोहर अभियान हमारे जलस्त्रोतों को संरक्षित करने का प्रयास है।
1.2   माँ नर्मदा के अस्तित्व को बचाने  के लिए नर्मदा मिशन की याचिका पर कार्यवाही करते हुए उच्च न्यायालय ने एक अभूतपूर्व फैसला सुनाया की उच्चतम बाढ़ सीमा से 300 मीटर तक का परिक्षेत्र नर्मदा की अपनी प्रापर्टी है जिस पर कोई भी निर्माण,अतिक्रमण, खनन या वनों को नष्ट करना अवैध है।
1.3  जल संरक्षण की दिशा में नर्मदा मिशन की याचिका पर कार्यवाही करते हुए उच्च न्यायालय ने  नर्मदा सहित सभी पवित्र नदियों में POP की मूर्तियों का विसर्जन प्रतिबंधित कर दिया इस फैसले को देश के 12 राज्यों ने भी लागू किया।
1.4 भारत के विविध  नगरों महानगरों  के महाविद्यालयों एवम विद्यालयों में युवा संवाद "नदी को जानो"
वर्तमान पीढ़ी को हमारी जीवनदायिनी नदियों के महत्व एवं उनकी महिमा बताने  तथा नदियों के जीवन पर मंडरा रहे खतरे से अवगत कराने हेतु एवम नई पीढ़ी को जल शुद्धिकरण तथा प्रकृति संरक्षण संवर्धन से जोड़ने हेतु भारत के विविध महाविद्यालयों ,विद्यालयों में समर्थ युवा संवाद नर्मदा मिशन द्वारा दादागुरु के सानिध्य में आयोजित किए गए जिसे नाम दिया गया नदी को जानो। नदी नहीं तो सदी नहीं जैसे ब्रम्ह वाक्य देने वाले दादागुरु की इस पहल से विद्यार्थियों में नदियों के अस्तित्व की रक्षा सुरक्षा का रुझान बड़े स्तर पर देखने को मिला। दादागुरु की सीख की जल को बनाया नहीं जा सकता पर बचाया जा सकता है पर चलकर ये युवा और बच्चे कल समृद्ध भारत के निर्माण के सहभागी होंगे
1.5 – वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
प्राकृतिक ट्रीटमेन्टप्लान्ट के माध्यम से अनेक तटों पर जल शुद्धिकरण  की दिशा में एक अनूठी पहल।
1.6 पंचकोशी यात्रा
स्थानीय परम्पराओं पर आधारित पंचकोशी परिक्रमाए माता नर्मदा जल शुद्धिकरण व संरक्षण  एवम जन- जागरूकता लाने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है।
1.7 जनभागीदारी से नालों को  गोद लेने की प्रक्रिया विशुद्ध अनूठी पहल
गंदा विषैला जल पवित्र नदियों से मिलने से रोकने के लिए अनेकों नालों को जन प्रयास द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया नर्मदा मिशन ने की है।

गौवंश संरक्षण सम्वर्धन

गौ सेवा हेल्पलाइन, समर्थ गौ चिकित्सा केंद्र, गौ समर्थ सेवा एक्सप्रेस(गौरथ)  समर्थ वेट डायग्नोटिक गौशालाओं का निर्माण
गौवंश का जीवन सुरक्षित और व्यवस्थित करने के लिए दादा गुरु के सानिध्य और मार्गदर्शन में नर्मदा मिशन द्वारा गौवंश के लिए अनेकों कार्य योजनाएं आरंभ की गई जिनमें समर्थ गौ सेवा हेल्पलाइन प्रदेश की पहली ऐसी हेल्पलाइन सेवा है जो गौवंश की सेवा सुरक्षा के लिए प्रारंभ की गई है इसके बाद गौ चिकित्सा केंद्र बेसहारा गौवंश के उपचार की सुविधा के साथ प्रारंभ हो गए हैं जहां गौ सेवक और पशु चिकित्सक 24 घंटे अपनी निशुल्क सेवाएं देते हैं बीमार वृद्ध और घायल गौवंश को चिकित्सालय तक पहुंचाने का कार्य गौरथ अर्थात गौ समर्थ सेवा एक्सप्रेस करती है यह गौवंश की एंबुलेंस है जो विभिन्न जिलों में कार्य कर रहीं हैं जिनमें गन्तव्य पर पहुंचकर चिकित्सा करने की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके साथ साथ रोगों की पहचान टेस्ट एक्सरे इत्यादि करने के लिये आधुनिक मशीनों से युक्त लैब की स्थापना भी नर्मदा मिशन द्वारा की गई है।
साथ साथ समाज को गौवंश की सेवा से जोड़ने लिए दादागुरु ने गौशालाओं को गौतीर्थ के रूप में व्यवस्थित किया जिसमें लोग अपने किसी विशेष दिन का उत्सव गौवंश के सानिध्य में मना कर गौमाता की आरती में शामिल होकर गौसेवा से भी जुड़ते हैं । हमारी सुख समृद्धि की आधार हमारी गौमाता को सुरक्षित संरक्षित करने के लिए दादागुरु प्रण प्राण से संकल्पित हैं और नर्मदा मिशन के माध्यम से नित नए सेवा प्रकल्प आरम्भ कर रहे हैं।

समर्थ पालना घरों (नर्सरी)  की विविध प्रदेशों में जिलेवार स्थापना

प्रकृति संरक्षण संवर्धन की दिशा में  कार्य करते हुए नर्मदा मिशन द्वारा दादागुरु के मार्गदर्शन में जिलेवार समर्थ पालना घरों की स्थापना की  गई है । जिसका उद्देश्य मूल वृक्षों  के बीजों से पौधों को तैयार करना है चूंकि आज मूल वृक्षों के बीजों की उपलब्धता नगण्य होती जा रही है संकर बीजों में गुणवत्ता में कमी देखी जाती है अतः वृक्षारोपण में अधिक से अधिक मूल वृक्षों का ही रोपण हो इस लक्ष्य के साथ साथ कम मूल्य में पौधा उपलब्ध कराना भी  नर्मदा मिशन का एक उद्देश्य है। जिससे हर एक वर्ग का  सदस्य वृक्षारोपण में अपनी सहभागिता ज्यादा से ज्यादा दे सके और पौधों को स्थापित कर संरक्षित कर सके।इसके अलावा विभिन्न जनपदों के प्रत्येक ग्राम में समर्थ पंचवटी (पांच देववृक्ष) की स्थापना भी की गई है जो आगे भी जारी रहेगी। सम्पूर्ण नर्मदा पथ को हरा भरा करने तथा वसुधा को हरित चूनर ओढ़ाने के साथ साथ रोजगार के अवसर भी प्रदान करना है।

स्वच्छता

स्वच्छता का वर्ल्ड रिकॉर्ड जबलपुर के नाम
दादा गुरु के पावन सानिध्य में जबलपुर नगर निगम द्वारा आयोजित स्वच्छता अभियान को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है इस आयोजन में 300000 व्यक्तियों ने अपना योगदान दिया था जिसमें जबलपुर की अनेकों संस्थाओं संगठनों, विद्यालय, महाविद्यालय, के विद्यार्थियों निगम के अधिकारी कर्मचारियों के अलावा अनेकानेक सीनियर सिटीजन एवं जबलपुर लोगों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता कर इस आयोजन को सफल बनाया।
इस स्वच्छता मुहिम के पीछे अपने शहर को स्वच्छ और सुंदर तथा रोगमुक्त करने का सुंदर विचार था। नर्मदा मिशन का उद्देश्य भी स्वच्छ भारत समर्थ भारत का है अतः इस स्वच्छता अभियान में दादा गुरु के मार्गदर्शन में जिस तरह से एकजुट होकर कार्य किया गया वह अनुकरणीय एवं अविस्मरणीय है।

परिक्रमा

इस सदी की सबसे बड़ी मुहिम
3200 कि.मी. निराहार माँ नर्मदा सेवा परिक्रमा
ना भुतो ना भविष्यति-द्वितीयो ना अस्ति ना कोई है.ना कोई होगा, दादागुरु के जैसा।
1100 से अधिक दिनो से चल रहा विश्व का सबसे बड़ा निराहार सत्याग्रह… दादा गुरू (धुनी वाले) को अखण्ड साधना के असाधारण अकल्पनीय पैदल 3200 कि.मी. नर्मदा परिक्रमा के प्रथम चरण पूर्ण द्वितीय चरण 27 नबम्बर 2023 से ओम्कारेश्वर से पुनः प्रारम्भ।

विश्व की अमूल्य धरोहर पातालकोट ,अमरकंटक सहित अन्य धरोहरों को बचाने की मुहिम

पातालकोट  जो कि 3000 फीट की गहराई में अपने 12 गांव लेकर खड़ा हुआ है जहाँ आज भी अन्य जगहों की तुलना में विशुद्ध रूप में प्रकृति विद्यमान है एवम हज़ारों प्रकार की औषधीय जड़ी बूटियों का भंडार है । एक समय था जब सूरज की रोशनी भी यहाँ नहीं पहुंच पाती थी किन्तु आज दृश्य अलग है पातालकोट मानवीय लालसाओं की भेंट चढ़ता जा रहा रहा है यहाँ की वन संपदा नष्ट हो रही है जड़ी बूटियां नष्ट हो रही है ,प्राकृतिक खेती करने वाले वन आदिवासी  केमिकल युक्त कृषि कर रहे है।नतीजा पहाड़ दरक रहे हैं वन सम्पदा नष्ट हो रही है अतः वन संरक्षण सम्वर्धन करने व आदिवासियों का अन्यत्र पलायन रोकने के उद्देश्य से पहले तो  दादागुरु ने एक पातालकोट महोत्सव का आयोजन किया जिसमें देश विदेश के एक लाख लोग शामिल हुए ततपश्चात दादागुरु ने अपना चातुर्मास पातालकोट में किया तथा प्रकृति संरक्षण सम्वर्धन के लिए यहाँ अनेकों उल्लेखनीय कार्य आरम्भ किये। जैसे नर्मदा मिशन ने दादागुरु के सानिध्य व मार्गदर्शन में सर्वप्रथम 2 लाख पौधों को  रोपित किया  एवम उनकी रक्षा सुरक्षा के लिए कार्य योजना बनाई इसके साथ साथ पातालकोट में पाई जाने वाली एक विशेष प्रकार की घास जो मिट्टी को मजबूती से पकड़ती है के बीजों का रोपण हरेक पहाड़ी एवम मैदानी जगहों पर किया गया। जिससे मिट्टी के क्षरण को रोका जा सके इसके अलावा पालनाघर (नर्सरी)की स्थापना की गयी जिसमे मूल पेड़ों के बीजों से ही पौधों को तैयार किया गया इसमें लोगों को गांव में ही रोज़गार भी मिला। औषधीय जड़ी बूटियों का संरक्षण  सम्वर्धन भी सफलतापूर्वक किया गया।
सीता रेवा, दूधी इत्यादि  सहायक नदियों को संरक्षित करने  के लिए विविध माध्यमों का प्रयोग किया गया जिसमें दादागुरु के आह्वान पर स्थानीय जनसमुदाय ने अपनी सहभागिता निभाई ।लोग जो धीरे धीरे वनों से दूर हो रहे थे पुनः प्रकृति की औऱ लौटे ओर आज पातालकोट दादागुरु का ऋणी है कि समय रहते स्थानीय रहवासियों में इतनी जाग्रति तो आ ही गयी कि किसी भी प्रलोभन में आकर वे अपनी वन संपदा को नष्ट नहीं करेंगे। इसके साथ ही बकस्वाहा जंगल, नर्मदा का रायपेरियन ज़ोन, अमरकण्टक की औषधीय वन संपदा आदि के संरक्षण सम्वर्धन के लिए नर्मदा मिशन दादागुरु के सानिध्य औऱ मार्गदर्शन में कार्य कर रहा है।

एक दिवसीय गौर गणेश निर्माण  प्रकृति संरक्षण की दिशा की अद्वितीय पहल

विगत अनेकों वर्षों से नदियों को प्रदूषण से बचाने तथा हमारी प्राचीनतम परंपराओं को पुनर्जीवित करने के पवित्र उद्देश्य को लेकर गणेश उत्सव के पावन दिनों में  सैकड़ों की संख्या में भक्तों औऱ गुरूपरिवारों द्वारा एकदिवसीय गौर गणेश का निर्माण दादा गुरु के सानिध्य  और मार्गदर्शन में  किया जा रहा है प्रकृति पूजा और जल संरक्षण की कड़ी में एक और कदम गौमय से भगवान गणेश के स्वरूप का निर्माण है जो हमारी प्राचीन पद्धति भी है दादागुरु ने पर्व परंपराओं को प्रकृति से जोड़कर प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक   अनुकरणीय प्रयोग किया है गणेश उत्सव के बाद इन गौमय अर्थात गोबर से निर्मित गणेश जी की प्रतिमाओं को खेत खलिहान में विसर्जित किया जाता है जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और पवित्र नदियां भी केमिकल युक्त मूर्तियों के विसर्जन से मुक्त रहती हैं।

वैश्विक महामारी कोरोना के लॉकडाउन में पीड़ित मानव सेवा का उत्कर्ष आदर्श

गौरतलब है कि भयावह महामारी कोरोना में जबलपुर के हाइवे से पैदल या वाहनों से निकल रहे भूखे प्यासे मजदूरों  के भोजन चिकित्सा व अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए दादागुरु के सानिध्य में नर्मदा मिशन के सदस्यों ने प्रतिदिन 18 घण्टे सेवाएं दी। हाइवे के अतिरिक्त शहर में हर उस जगह प्रतिदिन भोजन, चिकित्सा ,के अतिरिक्त सेनेटाइजर, ग्लोब्स व अन्य जरूरतों के सामान भी उपलब्ध कराए गए जहाँ जहाँ जरूरत थी।कुछ खास जगहों को चिन्हित भी किया गया।ज्ञातव्य है कि 25000 लोगों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराने का संकल्प नर्मदा मिशन का था।लॉकडाउन के कारण सड़कों पर भूखे रह रहे गौवंश व मवेशियों के लिए भी समुचित आहार व्यवस्था की गई।भूख प्यास से बीमार हुए अनेकों जीवों की चिकित्सा की  सम्पूर्ण व्यवस्था  भी नर्मदा मिशन ने दादागुरु के  मार्गदर्शन व सानिध्य में की। प्रदेश को गौरवान्वित करने वाली भीषण आपदा एवम भयावह महामारी में की गयी  नर्मदा मिशन की इस सेवा को मानवता सदैव याद रखेगी।

साम्प्रदायिक सद्भावना का प्रतीक निशान  महोत्सव

निशान अथवा ध्वज देवी-देवताओं ,राष्ट्र व धर्म के प्रति हमारी श्रद्धा एवं सम्मान प्रकट करने का प्रतीक है यह परंपरा बहुत प्राचीन है और समूचे विश्व में सर्वमान्य है इस परंपरा से समाज में सद्भाव जागृत करने के उद्देश्य से  दादा गुरु ने निशान महोत्सव का आरंभ किया जिसमें विभिन्न धर्म संप्रदाय के लोग अपना-अपना ध्वज लेकर एक स्थान पर एकत्रित होते हैं इन सभी ध्वजों को एक जगह एक साथ लगाया जाता है छिंदवाड़ा के इस महोत्सव में 300 गांव के साथ-साथ अनेकों शहरों के हजारों लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं  यह महोत्सव सर्वधर्म समभाव का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है । इसी तरह गंगा दशहरा  को नर्मदापुरम में अन्य जिलों में अलग अलग तिथियों में यह  राष्ट्र धर्म का प्रतीक  निशान महोत्सव जाति ,धर्म ,पंथ, सम्प्रदाय से ऊपर उठकर मनाया जाता है।
सर्वधर्म समभाव जन सेवा
यदि प्रकृति की रक्षा और संवर्धन करना है तो जाति और धर्म के आधार पर नहीं तो प्रकृति के प्रति मानवीय जिम्मे दारी के आधार पर मानव समाज को एकजुट होना होगा। प्रकृति की सेवा एक संयुक्त समाज ही कर सकता है। नर्मदा मि शन सभी धर्मों की समानता पर आधारित कई कार्यक्रम आयोजित करता है, जिसका उद्देश्य प्रकृति की सेवा और मानव सेवा के लिए सभी धर्मों को इकट्ठा करना है।

जैविक खेती

पर्यावरण के अनुकूल खेतीः
नर्मदा मिशन द्वारा भारतीय प्राचीन कृषि विधियों का अध्ययन किया गया, जिसमें गाय आधारित कृषि पद्धति, प्रा कृतिक वन कृषि पद्धति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा पर आधारित खेती के तरीके शामिल हैं। इसके अलावा अक्सर खो जाने वाले प्राचीन भारतीय बीजों के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में भी काम किया जा रहा है। इन विधियों के सफल प्रयोग कुछ कि सानों के खेत में किए गए।

प्रकृति पर्यावरण संसद का आयोजन

दादागुरु के सानिध्य औऱ मार्गदर्शन में जबलपुर में देश की पहली प्रकृति पर्यावरण का संसद का आयोजन नर्मदा मिशन द्वारा किया गया। जिसमें सम्पूर्ण भारत के पर्यावरणविद एवम प्रकृति पर्यावरण पर कार्य करने वाली अनेकानेक संस्थाओं ने सहभागिता की।
इस संसद के आयोजन का उद्देश्य प्रकृति पर्यावरण संरक्षण सम्वर्धन ,जल शुद्धिकरण, गौवंश आधारित प्राकृतिक कृषि  की नवाचार ओर प्राचीन पद्धतियों के  प्रयोग औऱ उनके क्रियान्वयन के लिये वैज्ञानिक ,आध्यात्मिक सामयिक विमर्श के साथ साथ  संरक्षण की दिशा में प्राथमिकता से कार्य कैसे किया जाए इस पर भी चिंतन करना था।
इस आयोजन में सभी सहभागी सदस्यों ने  पर्यावरण  संरक्षण संवर्धन के लिए दादा गुरु के सानिध्य में शपथ भी  ग्रहण की । इस संसद में शामिल होने के बाद   सभी पर्यावरण समितियां  और पर्यावरण विद संरक्षण संवर्धन का कार्य पूरे भारत में त्वरित स्तर पर अपने-अपने क्षेत्रों में कर रहे हैं यही इस संसद का उद्देश्य था।

शक्ति की सगुण उपासना

शक्ति की की सगुन उपासना में पांच माता का पूजन  पँचमूर्तियों के रूप में दादा गुरु ने आरंभ करवाया है। यह पांच माताएं हैं ।

1) जननी (जन्म देने वाली माँ)
2) जीवन दायिनी ( पालने वाली पवित्र नदियाँ )
3) धेनु 
4) धरा 
5)राष्ट्रमाता

इन पांचो माताओं पर ही हमारा जीवन आधारित है इसी प्रकार नवरात्रि के पावन पर्व पर भी दादा गुरु ने सगुण उपासना को शक्ति की आराधना का आधार बनाया  अर्थात वनस्पतियों में छिपी दैवीय ऊर्जा का परिचय दादा गुरु ने करवाया तथा उनका स्वरूप भी बतलाया जैसे प्रथम शैलपुत्री यानी हरड़, द्वितीय ब्रह्मचारिणी अर्थात ब्राह्मी ,तृतीय चंद्रघंटा अर्थात चंद्रसुर, चतुर्थ कूष्मांडा यानी पेठा ,पंचम स्कंध माता अर्थात अलसी, षष्टम कात्यायनी अर्थात मोईया ,सप्तम कालरात्रि यानी नागदोन ,अष्टम महागौरी यानी तुलसी ,नवम सिद्धिदात्री यानी शतावरी । मार्कंडेय पुराण के अनुसार नव देवी इन नो औषधीय के रूप में प्रकृति में उपस्थित है इसलिए नवदुर्गा उत्सव में दादा गुरु ने प्रकृति पूजा को श्रेष्ठ मानते हुए मां की आराधना उपासना के साथ इन औषधीय पौधों की स्थापना करके पूजन करने की नवीन शुरुआत करके समाज को प्रकृति उपासना से जोड़ा है।

रक्तवीर ब्लड कैंप

दादागुरु की प्रेरणा से जरूरतमंदों के लिए यह रक्तसेवा आरम्भ की गई है ।

निशुल्क स्वास्थ जांच शिविर

कमजोर तबके के व्यक्तियों के लिए नर्मदा मिशन निशुल्क जांच शिविर का आयोजन समय समय पर करता है फिर जरूरतमंदों को चिकित्सा भी उपलब्ध कराता है।

जन जागरण जन चेतना यात्रा

जनजागरण जनचेतना यात्रा पुर्णतः प्रकृति पर्यावरण संरक्षण सम्वर्धन के लिए भिन्न भिन्न स्थानों पर आयोजित की जाती है।

निशुल्क पशु जांच शिविर

निशुल्क पशु जांच शिविर का आयोजन भी नर्मदा मिशन द्वारा समय समय पर किया जाता है।जिसमें वरिष्ठ चिकित्सको को बुलाया जाता है।

राष्ट्र सेवा

नर्मदा मिशन के सभी अतुलनीय कार्य स्वस्थ ,समर्थ औऱ आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना पर आधारित हैं। दादागुरु जीवन अस्तित्व बचाने की जिस मुहिम के उन्नायक है वह राष्ट्र सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है।