पर्यावरण प्रकृति गौवंश का संरक्षण संवर्धन एवं मां नर्मदा के अस्तित्व को बचाने के लिए विगत लगभग 3
वर्षों से दादा गुरु समर्थ सद्गुरू अन्न आहार त्याग कर सत्याग्रह महाव्रत कर रहे हैं। माँ नर्मदा के जीवन
अस्तित्व को बचाने की इस मुहिम में दादागुरु ने निराहार रहकर हाल ही में माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा
का प्रथम चरण अकल्पनीय व अदभुत रूप में पूर्ण किया है । यह परिक्रमा यात्रा अदभुत अनुभवों औऱ
अविस्मरणीय रहस्यों का साथ पूर्ण हुई है।
इसके पूर्व भी लगातार भारत के विविध प्रांतों में दो लाख किमी से अधिक की यात्राएं के साथ जप ,तप,
ध्यान ,साधना, सेवा, रात्रि जागरण करते हुए दादागुरु निरंतर जनजागरण कर रहे हैं।
विगत तीन वर्षों से सिर्फ नर्मदा जल ग्रहण कर क्रियाशील रहते हुए दादागुरु ने माँ नर्मदा के जल की शक्ति
,सामर्थ्य,ऊर्जा, औऱ जीवंतता को प्रकट कर दिनभर में 18 घण्टे कर्मशील रहते हुए दादागुरु ने जल ही
जीवन है वाक्य को सत्य साबित कर चरितार्थ किया है वे कहते भी हैं कि तुम्हारे सामने सन्त नहीं बैठा है
सत्य बैठा है। एकत्व भाव रखकर चलने वाले दादागुरु "एक नज़र एक विचार" "एक सृष्टि एक दृष्टि" के दर्शन
को जीवन में उतारना सिखा रहे हैं। अतः इस सदी में किए जा रहे दादागुरु के इस अकल्पित सत्यग्रह
महाव्रत को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया