उच्चतम बाढ़ सीमा से 300 मीटर तक का परिक्षेत्र माँ नर्मदा की प्रॉपर्टी घोषित

ज्ञातव्य है की नदी एक जीवन है एक प्रणाली है एक व्यवस्था है जिसे अपने जीवन को अमर रखने का वरदान प्रकृति ने दिया है नदी अपने जल को शुद्ध और अविरल बनाए रखने के लिए स्वयं ही अपनी चिकित्सा करने में सक्षम है किंतु नदी के जो चिकित्सीय साधन है या उसका स्वयं का जो चिकित्सीय प्राण क्षेत्र या परिक्षेत्र है उस पर मनुष्यों द्वारा अतिक्रमण, उत्खनन , दोहन,वृक्षों की कटाई इत्यादि तीव्रता से किया जा रहा है इसलिए  नदी की स्वयं को रिपेयर करने की क्षमता भी खत्म हो गई है और नदी का जीवन भी संकट में है।और रायपेरियन ज़ोन संकट में आ गया जिससे नदी के साथ साथ नदी के अंदर का  जलीय जीवन और वनस्पतियाँ भी खतरे में आ गयी । बहुत कुछ विलुप्त भी हो गया।  मां नर्मदा भी मानव की इसी घृणित क्रियाकलापों से जीर्ण क्षीर्ण हो चुकी है अतः मां नर्मदा के प्राणक्षेत्र रायपेरियन ज़ोन को बचाने के लिए दादागुरु के मार्गदर्शन में नर्मदा मिशन द्वारा जनहित में हाई कोर्ट जबलपुर में एक याचिका लगाई गई जिस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने देश का अहम एवम ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि  उच्चतम बाढ़ स्तर से 300 मीटर तक का परिक्षेत्र मां नर्मदा की अपनी प्रॉपर्टी है अतः इस पर किसी भी प्रकार का कोई निर्माण उत्खनन दोहन या वन कटाई सभी अवैध है नर्मदा मिशन के अथक प्रयासों से मिली  यह सफलता मां नर्मदा के अस्तित्व को बचाने का सबसे बड़ा प्रयास है।

पवित्र नदियों तथा प्रकृति पर्यावरण के संरक्षण संवर्धन के लिए *दादागुरु द्वारा किया जा रहा अखण्ड निराहार महाव्रत गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

पर्यावरण प्रकृति गौवंश का संरक्षण संवर्धन एवं मां नर्मदा के अस्तित्व को बचाने के लिए विगत लगभग 3 वर्षों से दादा गुरु समर्थ सद्गुरू अन्न आहार त्याग कर सत्याग्रह महाव्रत कर रहे हैं। माँ नर्मदा के जीवन अस्तित्व को बचाने की इस मुहिम में दादागुरु ने  निराहार रहकर हाल ही में माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा का प्रथम चरण अकल्पनीय व अदभुत रूप में पूर्ण किया है  । यह परिक्रमा यात्रा अदभुत अनुभवों औऱ अविस्मरणीय रहस्यों का साथ पूर्ण हुई है।  इसके पूर्व भी लगातार भारत के विविध प्रांतों में दो लाख किमी से अधिक  की यात्राएं  के साथ  जप ,तप, ध्यान ,साधना, सेवा, रात्रि जागरण करते हुए दादागुरु निरंतर जनजागरण कर रहे हैं।   विगत तीन वर्षों से सिर्फ नर्मदा जल ग्रहण कर क्रियाशील रहते हुए दादागुरु ने माँ नर्मदा के जल की शक्ति ,सामर्थ्य,ऊर्जा, औऱ जीवंतता को प्रकट कर दिनभर में 18 घण्टे कर्मशील रहते हुए दादागुरु ने जल ही जीवन है वाक्य को सत्य साबित कर चरितार्थ किया है वे कहते भी हैं कि   तुम्हारे सामने सन्त नहीं बैठा है सत्य बैठा है। एकत्व भाव रखकर चलने वाले दादागुरु "एक नज़र एक विचार" "एक सृष्टि एक दृष्टि" के दर्शन को जीवन में उतारना सिखा रहे हैं। अतः इस सदी में किए जा रहे दादागुरु के इस अकल्पित  सत्यग्रह महाव्रत को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया

संस्कार कावड़ यात्रा 'रन फ़ॉर नेचर' गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी दादागुरु श्री भैयाजी सरकार के मार्गदर्शन व सानिध्य में निकलने वाली जबलपुर की संस्कार कावड़ यात्रा रन फ़ॉर नेचर जो कि प्रकृति संरक्षण सम्वर्धन, सगुण उपासना व सहयोग की भावना की एक अनूठी मिसाल है ।  गोल्डन बुक ऑफ  वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज की गई।  इस काँवड़ यात्रा में  प्रत्येक वर्ष हज़ारों कांवड़िये सावन के द्वितीय सोमवार को  अपनी अपनी काँवड़ में शिवस्वरूप देववृक्ष व माँ नर्मदा के अमृततुल्य जल को लेकर 35 किमी पैदल चलते हैं।इस यात्रा का संयोजन श्री शिव यादवजी करते हैं। जिस तरह श्रवण कुमार कांवड़ में अपने माता-पिता को लेकर चले थे ठीक उसी तर्ज पर संस्कार कांवड़ यात्रा के कांवड़िये एक काँवड़ में जगतजननी माँ नर्मदा का जल तथा दूसरे काँवड़ में पितृ स्वरूप देववृक्ष को रखकर संकल्प के साथ चलते हैं इन देववृक्षों को विधिपूर्वक रोपित कर संरक्षित किया जाता है।  जल  संरक्षण व वन संरक्षण का संदेश लेकर चलने वाली यह यात्रा परम्परा के धागे में सगुण उपासना के मोती पिरोकर  वसुधा की सूने आँचल को हरा भरा करने का अदभुत संकल्प है,  साथ ही आज यह विश्व की अनूठी परम्परा के रूप में खड़ी हुई है जिसमें शिव आराधना के साथ प्रकृति पूजन व सगुण उपासना का संदेश है।

समर्थ वृक्ष रक्षा संकल्प दिवस "लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड" में दर्ज

10 अप्रैल 2017 को अमरकंटक में आयोजित समर्थ वृक्ष रक्षा संकल्प दिवस महोत्सव का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।  इस महोत्सव का उद्देश्य हर एक व्यक्ति को हमारी महागुरु आद्यशक्ति प्रकृति की शरण में ले जाकर वृक्षों की रक्षा का संकल्प दिलवाना था। हम जानते हैं कि हमारी प्राकृतिक संपदा वन प्रकृति का संतुलन हैं जीवन का औऱ जलचक्र का आधार हैं धरा का श्रृंगार है बाबजूद इसके वनों को नष्ट होने से हम बचा नहीं पा रहे न ही नए वनों की स्थापना कर पा रहे। दादागुरु अपना सर्वस्व न्यौछावर कर इन वन,जल अर्थात प्रकृति पर्यावरण को सुरक्षित संरक्षित करने का पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। इसी तारतम्य में दादा गुरु समर्थ श्री भैया जी सरकार के मार्गदर्शन व सानिध्य में नर्मदा मिशन के इस आयोजन मैं 3100 लोग अमरकंटक में उपस्थित हुए जिसमें बच्चे बूढ़े जवान सभी थे दादागुरु का संदेश है कि प्रकृति हमारी महागुरु है अतः हमें अपनी प्रकृति मां के साथ अपनत्व बनाकर रिश्ता कायम करना होगा तभी हम अपने अस्तित्व की रक्षा कर पाएंगे वृक्ष हमारे सगुण उपासना  के जीवंत आधार हैं तथा हमारे आदर्श हैं हमें हर संभव प्रयास करके इनका संरक्षण और संवर्धन करना चाहिए यदि हमें अपने जीवन को जल को और जमीन को बचाना है तो हमें प्रकृति से संधि करनी होगी एवम उसकी सुरक्षा करनी होगी। इसी संदेश और संकल्प के साथ दादा गुरु के सानिध्य में 3100 लोगों ने अमरकंटक में एक साथ वृक्षों को गले लगाया और फिर उन्हें रक्षा सूत्र बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया दादा गुरु के सानिध्य में नर्मदा मिशन द्वारा किए गए इस प्रयास को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इस क्षेत्र के एवं इस पद्धति के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के रूप में संकलित किया गया है।

स्वच्छता का वर्ल्ड रिकॉर्ड जबलपुर के नाम

दादा गुरु के पावन सानिध्य व मार्गदर्शन में जबलपुर नगर निगम द्वारा आयोजित स्वच्छता अभियान को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है इस आयोजन में तीन लाख, (300000) व्यक्तियों ने अपना योगदान दिया था जिसमें जबलपुर की अनेकों संस्थाओं संगठनों, विद्यालय, महाविद्यालय, के विद्यार्थियों निगम के अधिकारी कर्मचारियों के अलावा अनेकानेक सीनियर सिटीजन एवं जबलपुर लोगों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता कर इस आयोजन को सफल बनाया। इस स्वच्छता मुहिम के पीछे अपने शहर को स्वच्छ और सुंदर तथा रोगमुक्त करने का सुंदर विचार था। नर्मदा मिशन का उद्देश्य भी स्वच्छ भारत समर्थ भारत का है अतः इस स्वच्छता अभियान में दादा गुरु के मार्गदर्शन में जिस तरह से एकजुट होकर कार्य किया गया वह अनुकरणीय एवं अविस्मरणीय है।

महाव्रत के दौरान तीन बार रक्तदान गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज

महायोगी श्री दादागुरु ने अपने महाव्रत के दौरान ही तीन बार जरूरतमंदों को रक्तदान कर ज्ञान विज्ञान को भी अचंभित कर दिया। चूंकि दादागुरु विगत 3 वर्षों से सिर्फ नर्मदाजल  ही ग्रहण कर रहे हैं और पूर्णतः स्वस्थ हैं ।अतः दादागुरु की यह  रक्तसेवा गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज की गई।

1000 दिनों से अधिक दादागुरु का महाव्रत गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज

ज्ञातव्य है कि 13 जुलाई 2023 को श्री दादागुरु के महाव्रत को 1000 दिन पूर्ण हुए थे।  प्रकृति पर्यावरण के लिए किया जाने वाला सदी का प्रथम औऱ सबसे बड़ा महाव्रत जब 1000 दिवस की अवधि तक पहुंचा तो उसे  गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

निराहार महाव्रत के दौरान 3200 किमी की माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

प्रकृति पर्यावरण के लिए प्रथम बार  निरन्तर 25 घण्टे की सुर साधना गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

संस्कारधानी में विश्व संगीत दिवस पर दादागुरु के मार्गदर्शन व सानिध्य में नर्मदा मिशन व अन्य सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से 25 घण्टे लगातार गायकों व संगीतज्ञों द्वारा सुर साधना (गायन) की गई। प्रकृति पर्यावरण पर आधारित यह प्रयास गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। महायोगी श्री दादागुरु ने  निराहार रहते हुए 3200 किमी की माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा पूर्ण की।जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। हालांकि यह परिक्रमा का प्रथम चरण था द्वितीय चरण 27 नम्बर से  ओम्कारेश्वर से पुनः आरम्भ होगा।

पीओपी की मूर्तियों का पवित्र नदियों में विसर्जन  प्रतिबंधित

माँ नर्मदा सहित सभी पवित्र नदियों में  जहरीले कैमिकल रंगों से सराबोर मूर्तियों के विसर्जन से जहां जलीय जीव तेजी से लुप्त हो रहे हैं वहीं दूसरी औऱ जल भी अशुद्ध होता चला जा रहा हैऔऱ प्रदूषण का स्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है जिससे नदियों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। अतः नदियों के जीवन को बचाने के लिए दादागुरु के मार्गदर्शन में नर्मदा मिशन द्वारा हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई जिस पर  त्वरित कार्यवाही करते हुए अप्रेल 2013 में जबलपुर हाइकोर्ट द्वारा माँ नर्मदा सहित सभी पवित्र नदियों में पीओपी की मूर्तियों का  विसर्जन प्रतिबंधित कर दिया गया है । सभी प्रकार की मूर्तियां एक प्राकृतिक कुंड बनाकर ही विसर्जित की जाए यह आदेश भी पारित हुआ।जिसे देश के अनेक राज्यों ने भी अपनाया। जल शुद्धि करण संरक्षण में यह निर्णय मील का पत्थर साबित हुआ।

बकस्वाहा  के सिध्द जंगलक्षेत्र बचाने की मुहिम

बकस्वाहा के जंगल क्षेत्र को बचाने के पावन उद्देश्य से दादागुरु  बकस्वाहा बचाओ अभियान  से जुड़े तथा बकस्वाहा पहुंच कर  भृमित हो चुके ग्रामवासियों को सन्देश दिया कि  हमारा अस्तित्व वनों से है हीरों से नहीं है इसलिए विकास के नाम पर हम विनाश की लीला नहीं रचने देंगे। सेवा व्यवस्था और  विकास के नाम पर  लाखों वृक्षों को काटने की योजना क्षेत्र का विकास नही विनाश का कारण बनेगी। पूंजीपतियों कंपनियों से जुड़े दलाल व्यवस्था रोजगार विकास के नाम पर ग्रामीण जनों को भ्रमित कर रहे हैं अमूल्य वन संपदा धरोहर जो सदियों से हमारे जीवन हमारी व्यवस्था का मूल आधार है पूंजीपतियों कंपनियों के प्रलोभन में आकर हम अपने जीवन क्षेत्र से खिलवाड़  नहीं करेंगे। दादागुरु ने कहा कि पूंजीपतियों कंपनियों दलालों दबंगों के आकर्षण प्रलोभन से दूर रहे ग्रामीण जन । इन्हीं जंगलों से हमारा जीवन है हमारी व्यवस्था है।प्राण प्रण से जंगल बचाएँ जीवन बचाए सच्चा धर्म निभाए बुन्देलखण्ड की बलिदानी पावन धरा और अमूल्य प्राकृतिक वन संपदाओं धरोहरों के संरक्षण सम्वर्धन के  लिए प्राण प्रण से हम संकल्पित है।

भारत के विविध  नगरों महानगरों  के महाविद्यालयों एवम विद्यालयों में युवा संवाद "नदी को जानो*

वर्तमान पीढ़ी को हमारी जीवनदायिनी नदियों के महत्व एवं उनकी महिमा बताने  तथा नदियों के जीवन पर मंडरा रहे खतरे से अवगत कराने हेतु एवम नई पीढ़ी को जल शुद्धिकरण तथा प्रकृति संरक्षण संवर्धन से जोड़ने हेतु भारत के विविध महाविद्यालयों ,विद्यालयों में समर्थ युवा संवाद नर्मदा मिशन द्वारा दादागुरु के सानिध्य में आयोजित किए गए जिसे नाम दिया गया नदी को जानो। नदी नहीं तो सदी नहीं जैसे ब्रम्ह वाक्य देने वाले दादागुरु की इस पहल से विद्यार्थियों में नदियों के अस्तित्व की रक्षा सुरक्षा का रुझान बड़े स्तर पर देखने को मिला। दादागुरु की सीख की जल को बनाया नहीं जा सकता पर बचाया जा सकता है पर चलकर ये युवा और बच्चे कल समृद्ध भारत के निर्माण के सहभागी होंगे

जबलपुर में देश की प्रथम प्रकृति पर्यावरण संसद का आयोजन

दादागुरु के सानिध्य औऱ मार्गदर्शन में जबलपुर में देश की पहली प्रकृति पर्यावरण का संसद का आयोजन नर्मदा मिशन द्वारा किया गया। जिसमें सम्पूर्ण भारत के पर्यावरणविद एवम प्रकृति पर्यावरण पर कार्य करने वाली अनेकानेक संस्थाओं ने सहभागिता की। इस संसद के आयोजन का उद्देश्य प्रकृति पर्यावरण संरक्षण सम्वर्धन ,जल शुद्धिकरण, गौवंश आधारित प्राकृतिक कृषि  की नवाचार ओर प्राचीन पद्धतियों के  प्रयोग औऱ उनके क्रियान्वयन के लिये वैज्ञानिक ,आध्यात्मिक सामयिक विमर्श के साथ साथ  संरक्षण की दिशा में प्राथमिकता से कार्य कैसे किया जाए इस पर भी चिंतन करना था।    इस आयोजन में सभी सहभागी सदस्यों ने  पर्यावरण  संरक्षण संवर्धन के लिए दादा गुरु के सानिध्य में शपथ भी  ग्रहण की ।     इस संसद में शामिल होने के बाद   सभी पर्यावरण समितियां  और पर्यावरण विद संरक्षण संवर्धन का कार्य पूरे भारत में त्वरित स्तर पर अपने-अपने क्षेत्रों में कर रहे हैं यही इस संसद का उद्देश्य था।

प्राकृतिक जल ट्रीटमेन्टप्लान्ट के माध्यम से अनेक तटों पर जल शुद्धिकरण एक अनूठी पहल* ।

नर्मदा मिशन की पहल पर जल शुद्धिकरण की दिशा में ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना  की गई तथा जल संरक्षण-संवर्धन को दिशा में नर्मदा के तटोय क्षेत्रों में हजारों घरों में लगे वाटर हार्वेर्सटंग सिस्टम लगाए गए।

पवित्र नदियों में दीपदान की जगह दीपयज्ञ

जल शुद्धिकरण की दिशा में सभी पवित्र नदियों में दीपदान की प्राचीन परंपरा का युग परिस्थितियों के आधार पर नवीनीकरण करते हुए दादागुरु नें दीप दान के स्थान पर दीपयज्ञ की अनुकरणीय परम्परा आरम्भ की जिससे जल तो शुद्ध रहेगा भी जलीय जीवन भी सुरक्षित रहेगा।

गोबर गैस संयंत्रों की स्थापना

गौवंश का संरक्षण सम्वर्धन करने के पवित्र उद्देश्य से एवम स्वस्थ भारत के निर्माण की परिकल्पना को साकार करने के लिए गौमय के अनेकानेक प्रयोग नर्मदा मिशन द्वारा किये जा रहे हैं।

दादागुरु से प्रेरित होकर सरकार की नीतियां व  कानून बने

ज्ञातव्य है कि दादागुरु पिछले दो दशकों से मां नर्मदा ओर प्रकृति पर्यावरण के संरक्षण सम्वर्धन व जल शुद्धिकरण गौवंश संरक्षण आदि क्षेत्रों में अनवरत कार्य करते हुए अभिनव प्रयोगों  व  अनुकरणीय व सराहनीय कार्यो को सम्पादित कर रहे हैं दादागुरु के विचार से प्रेरित होकर सरकार ने भी ऐसी ही कुछ योजनाएं आरम्भ की है जिन पर 15 वर्ष पूर्व से ही नर्मदा मिशन दादागुरु के सानिध्य में कार्य कर रहा है

जैविक नर्मदा तट  अमरकंटक में माँ नर्मदा के तट से-300 मीटर तक का परिक्षेत्र  no construction zone नियम त्वरितरूप से लागू

नदी को जानो संवाद

जल ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना

गौ वंश संरक्षण पर आधारित विभन्न कार्ययोजना

गौ आधारित कृषि  जैविक खेती का आरम्भ

दादागुरु के मार्गदर्शन में गौआधारित जैविक कृषि का आरम्भ किया गया जिससे एक तो कैमिकल रहित शुध्द औऱ पौष्टिक अनाज सब्जी आदि की उपलब्धता होगी  साथ ही गौवंश भी संरक्षित होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे  तथा माटी की उर्वरकता भी बढ़ेगी।

परिक्रमा मार्ग में माँ नर्मदा पर पैदल फुटब्रिज का निर्माण

प्राचीन सनातनी गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था के आधार के साथ आधुनिक सभी आयामो की शिक्षा को समन्वित कर  समर्थ विद्यापीठ की स्थापना

दादागुरु के लिए प्रधानमंत्री जी का ट्वीट

दादागुरु के प्रकृति पर्यावरण के अंतर्गत जीवनदायनी नदियों,पर्वतों माटी,वनों के आदि के संरक्षण सम्वर्धन व पीड़ित मानवता सेवा गौवंश सेवा के अकल्पनीय ओर अनुकरणीय सफल प्रयासों को देखकर देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद मोदी जी ने ट्वीट कर लिखा है कि" आपके प्रयासों का समाज सदैव ऋणी रहेगा।

माँ नर्मदा के जीवन पर आधारित देश का प्रथम लेज़र शो सँस्कार धानी में प्रदर्शित

मंत्रालय की स्थापना

दादागुरु के  नर्मदा संरक्षण सम्वर्धन विचार और पर्यासबने जहाँ एक औऱ समाज को एकजुट होकर माँ नर्मदा की रक्षा सुरक्षा के लिए खड़ा किया वहीं इसी विचार से सरकार ने एक मंत्रालय बनाया जो नर्मदा संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करेगा।